कैसा ये इश्क है :मेरे ब्रदर की दुल्हन


कोई  बोले  दरिया  है
कैसा , कैसा  है  इश्क
कोई  माने  सेहरा  है
कैसा , कैसा  है  इश्क
कोई  सोने  सा  तोले  रे
कोई  माती  सा  बोले  रे
कोई  बोले  के  चांदी का  है  छुरा
होता  ऐसे  ये  मौके  पे
रोका  जाए  न  रोके  से
अच्छा  होता  है  होता  ये  बुरा
कैसा  ये  इश्क  है , अजब  सा  रिस्क  है ..


मुश्किलों  में  ये  डाले
जो  भी  चाहे  करा  ले,
बदले  ये  दिलों  के  फैसले,
मन  का  मौजी ,
इश्क  तो  जी
अलबेली  सी  राहों  पे  ले  चले
कोई  पीछे  न  आगे  है
फिर  भी  जाने  क्यूँ  भागे  है
मारे  इश्क  का  इश्के  का  दिल  मेरा
इश्के  उसके  ये  हिस्से  में
तेरे  मेरे  ये  किस्से  में
मौला  सीखे  बिन  सीखे  बिन  दे  सिखा
कैसा  ये  इश्क  है , अजब  सा  रिस्क  है ..
कैसा  ये  इश्क  है , अजब  सा  रिस्क  है ..
(Aalaap)

नैना  लागे  तो  जागे
बिना  डोरी  या  धागे
बंधते  हैं  दो  नैना  ख्वाब  से
न  अत  हो  न  पता  हो
कोरे  नैनो  में  कोई  आ  बसे ,
इसका  उसका  न  इसका  है
जाने  कितना  है  किसका  है
कैसी  भासा  में  भासा  में  है  लिखा
इश्के  उसके  ये  हिस्से  में
तेरे  मेरे  ये  किस्से  में
मौला  सीखे  बिन  सीखे  बिन  दे  सिखा
कैसा  ये  इश्क  है , अजब  सा  रिस्क  है ..
कैसा  ये  इश्क  है , अजब  सा  रिस्क  है ..

No comments:

Post a Comment

Google Analytics Alternative