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आँखों ही आँखों में करे बातें : बर्फी

आँखों ही आँखों में करे बातें
गुपचुप गुपचुप गुपचुप होए
फुस फुस फुस फुस
ख़्वाबों की नदी में खाए गोते

आला आला मतवाला बर्फी
पाँव पड़ा मोटा छाला बर्फी
रातों का है ये उजाला बर्फी
गुमसुम गुमसुम ही मचाये ये तो उत्पात
खुराफाती करे नॉन-स्टॉप
मौला इसी से बचाई ले
कभी न रुकता रे, कभी न थमता रे
रंग जो दिखा उसे खुशियों की ठोकर मारे
पलकों की हरमुनिया, नैनों की ग रे स रे

धड़कन की रिदम पे ये गाता जाए गाने प्यारे
भोला न समझो ये चालू खिलाडी है बड़ा
सूरज ये बुझा देगा, मारेगा फूँक ऐसी
चौक तलैय्या पीपल छैय्या
हर कूचे की ऐसी तैसी
आँखों ही आँखों में करे बातें
गुपचुप गुपचुप...

बर्फी जो अम्मा जी की कोख में था सोया
अम्मा ने मर्फी का रेडियो मंगाया
मर्फी मुन्ना, जैसा लल्ला
अम्मा का था सपना
मुन्ना जब हौले-हौले दुनिया में आया
बाबा ने सीलोन वाला स्टेशन लगाया
रेडियो ऑन हुआ, अम्मा ऑफ हुई
टूटा हर सपना
मुन्ना म्यूट ही आसूं बहाए
मुन्ना झुनझुना सुन भी न पाए
आला आला मतवाला बर्फी

फिर ले आया दिल मजबूर : बर्फी

फिर ले आया दिल मजबूर
क्या कीजे
रास न आया रहना दूर
क्या कीजे
दिल कह रहा उसे मुकम्मल कर भी आओ
वो जो अधूरी सी बात बाकी है
वो जो अधूरी सी याद बाकी है

करते हैं हम आज कुबूल
क्या कीजे
हो गयी थी जो हमसे भूल
क्या कीजे
दिल कह रहा उसे मयस्सर कर भी आओ
वो जो दबी सी आस बाकी है
वो जो दबी सी आंच बाकी है

किस्मत को है ये मंज़ूर
क्या कीजे
मिलते रहे हम बादस्तूर
क्या कीजे
दिल कह रहा है उसे मुसलसल कर भी आओ
वो जो रुकी सी राह बाकी है
वो जो रुकी सी चाह बाकी है

इत्ती सी हंसी : बर्फी

इत्ती सी हंसी
इत्ती सी ख़ुशी
इत्ता सा टुकड़ा चाँद का
ख़्वाबों के, तिनकों से
चल बनाएँ आशियाँ

दबे दबे पाँव से
आये हौले हौले ज़िन्दगी
होंठों पे ऊँगली चढ़ा के
हम ताले लगा के चल
गुमसुम तराने चुपके-चुपके गायें
आधी-आधी बाँट लें
आजा दिल की ये ज़मीं
थोड़ा सा तेरा सा होगा
थोड़ा मेरा भी होगा
अपना ये आशियाँ

ना हो चार दीवारें
फिर भी झरोखें खुले
बादलों के हो परदे
शाखें हरी, पंखा चले
ना हो कोई तकरारें
अरे मस्ती, ठहाके चले
प्यार के सिक्कों से
महीने का खर्चा चले
दबे दबे पाँव से...

सांवली सी रात : बर्फी

सांवली सी रात हो, ख़ामोशी का साथ हो
बिन कहे, बिन सुने, बात हो तेरी मेरी
नींद जब हो लापता, उदासियाँ ज़रा हटा
ख़्वाबों की रज़ाई में, रात हो तेरी मेरी

झिलमिल तारों सी आँखें तेरी
खारे खारे पानी की झीलें भरे
हरदम यूँ ही तू हंसती रहे
हर पल है दिल में ख्वाहिशें
ख़ामोशी की लोरियां सुन तो रात सो गयी
बिन कहे, बिन सुने...

बर्फी के टुकड़े सा, चंदा देखो आधा है
धीरे धीरे चखना ज़रा
हंसने रुलाने का, आधा-पौना वादा है
कनखी से तकना ज़रा
ये जो लम्हें हैं, लम्हों की बहती नदी में
हाँ भीग लूं, हाँ भीग लूं
ये जो आँखें हैं, आँखों की गुमसुम जुबां को
मैं सीख लूं, हाँ सीख लूं
अनकही सी गुफ्तगू, अनसुनी सी जुस्तजू
बिन कहे, बिन सुने...

दिल ये मेरा, बस में नहीं : बर्फी

दिल ये मेरा, बस में नहीं
पहले कभी ऐसा होता था नहीं
तू ही बता इस दिल का मैं
अब क्या करूँ
कहने पे, चलता नहीं
कुछ दिनों से, मेरी भी सुनता नहीं
तू ही बता इस दिल का मैं
उफ्फ अब मैं क्या करूँ

करता आवारगी
इसपे तो धुन चढ़ी, है प्यार की
जाने गुम है कहाँ
बातों में है पड़ा, बेकार की
उलटी ये बात है
ऐसे हालात है
गलती करे ये, मैं भरूँ
उफ़ दिल का क्या करूँ
मैं क्या करूँ...

दिल पे मेरा काबू नहीं
फितरत कभी इसकी ऐसी थी नहीं
तू ही बता...

क्यूँ, न हम-तुम : बर्फी

क्यूँ, न हम-तुम
चले टेढ़े-मेढ़े से रास्तों पे नंगे पाँव रे
चल, भटक ले ना बावरे
क्यूँ, न हम तुम
फिरे जाके अलमस्त पहचानी राहों के परे
चल, भटक ले ना बावरे
इन टिमटिमाती निगाहों में
इन चमचमाती अदाओं में
लुके हुए, छुपे हुए
है क्या ख़याल बावरे

क्यूँ, न हम तुम
चले ज़िन्दगी के नशे में ही धुत सरफिरे
चल, भटक ले ना बावरे

क्यूँ, न हम तुम
तलाशें बगीचों में फुरसत भरी छाँव में
चल भटक ले ना बावरे
इन गुनगुनाती फिजाओं में
इन सरसराती हवाओं में
टुकुर-टुकुर यूँ देखे क्या
क्या तेरा हाल बावरे

ना लफ्ज़ खर्च करना तुम
ना लफ्ज़ खर्च हम करेंगे
नज़र के कंकड़ों से
खामोशियों की खिड़कियाँ यूँ तोड़ेंगे
मिला के मस्त बात फिर करेंगे
ना हर्फ़ खर्च करना तुम
ना हर्फ़ खर्च हम करेंगे
नज़र की सियाही से लिखेंगे
तुझे हज़ार चिट्ठियाँ ख़ामोशी झिडकियां
तेरे पते पे भेज देंगे

सुन, खनखनाती है ज़िन्दगी
ले, हमें बुलाती है ज़िन्दगी
जो करना है वो आज कर
ना इसको टाल बावरे
क्यूँ, न हम तुम...
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