पहली बार मोहब्बत की है : कमीने (2009)

थोड़े भीगे भीगे से थोड़े नम है हम
कल से सोये वोए भी तो कम है हम
दिल ने कैसी हरक़त की है
पहली बार मोहब्बत की है
आखिरी बार मोहब्बत की है

आँखें डूबी-डूबी सी सुरमई मद्धम
झीलें पानी-पानी है बस तुम और हम
बात बड़ी हैरत की है
पहली बार...

ख्वाब के बोझ से कंप-कंपाती हुई
हलकी पलकें तेरी याद आता है सब
तुझे गुदगुदाना सताना यूँ ही सोते हुए
गाल पे टीपना मीचना बेवजह बेसबब
याद है
पीपल के जिसके घने साए थे
हमनें गिलहरी के जूठे मटर खाए थे
ये बरक़त उन हज़रत की है
पहली बार...

आजा आजा दिल निचोडें : कमीने (2009)

आजा आजा दिल निचोडें
रात की मटकी तोड़ें
कोई गुड लक निकालें
आज गुल्लक तो फोड़ें

है दिल-दिल दारा
मेरा तेली का तेल
कौड़ी-कौड़ी पैसा पैसा
पैसे का खेल
चल चल सड़कों पे होगी
ठैन-ठैन
ढैन-टेणां
टेणां टेणां

आजा की वन वे है ये ज़िन्दगी की गली एक ही चांस है
आगे हवा ही हवा है अगर सांस है तो ये रोमांस है
यही कहते हैं, यही सुनते हैं
जो भी जाता है जाता है वो फिर से आता नहीं
आजा आजा कल निचोड़े..

कोई चाल ऐसी चलो यार, अब के समंदर भी पुल पे चले
फिर तू चले उसपे, या मैं चलूँ, शहर हो अपने पैरों तले
कहीं खबरें हैं, कहीं खबरें हैं
जो भी सोये है कब्रों में..उनको जगाना नहीं..
आजा आजा दिल निचोड़े..

हमको हमीसे चुरा लो : मोहब्बतें (2000)

हमको हमीसे चुरा लो,
दिल में कहीं तुम छुपा लो.
हम अकेले, खो न जाएँ,
दूर तुमसे, हो न जाएँ,
पास आओ गले से लगा लो

ये दिल धड़का दो, जुल्फें बिखरा दो,
शर्मा के अपना आँचल लहरा दो.
हम जुल्फें तो बिखरा दें, दिन में रात न हो जाए,
हम आँचल तो लहरा दें, पर बरसात न हो जाए
होने दो बरसातें, करनी हैं कुछ बातें.
पास आओ गले से लगा लो.
हमको...

तुमपे मरते हैं, हम मर जायेंगे,
ये सब कहते हैं, हम कर जायेंगे.
चुटकी भर सिन्दूर से तुम अब ये मांग ज़रा भर दो,
कल क्या हो किसने देखा सब कुछ आज अभी कर दो.
हो न हो सब राज़ी, दिल राज़ी रब राज़ी
पास आओ गले से लगा लो.
हमको...

ब्रेथलेस : (शंकर महादेवन)

कोई जो मिला तो मुझे ऐसा लगता था
जैसे मेरी सारी दुनिया मैं गीतों की रुत
और रंगों की बरखा है
खुशबु की आंधी है
महकी हुई सी अब सारी फिजायें हैं
बहकी हुई सी अब सारी हवाएं हैं
खोयी हुई सी अब सारी दिशाएँ हैं
बदली हुई सी अब सारी अदाएं हैं
जागी उमंगें हैं
धड़क रहा है दिल
साँसों में तूफ़ान हैं, होठों पे नगमे हैं
आखों में सपने हैं,
सपनों में बीते हुए सारे वो सारे लम्हे हैं

जब कोई आया था, नज़रों पे छाया था
दिल मैं समाया था, कैसे मैं बताऊँ तुम्हें
कैसा उसे पाया था,
प्यारे से चेहरे पे बिखरी जो जुल्फें तो ऐसा लगता था
जैसे कोहरे के पीछे इक ओस मैं धुला हुआ फूल खिला है
जैसे बादल में एक चाँद छुपा है और झाँक रहा है
जैसे रात के परदे में एक सवेरा है रोशन रोशन
आखों में सपनों का सागर
जिसमें प्रेम सितारों की चादर जैसे झलक रही है
लहरों लहरों बात करे तो जैसे मोती बरसे
जैसे कहीं चांदी की पायल गूंजे
जैसे कहीं शीशे के जाम गिरे और छन से टूटे
जैसे कोई छिप के सितार बजाये
जैसे कोई चांदनी रात में गाए
जैसे कोई हौले से पास बुलाये

कैसी मीठी बातें थी वो
कैसी मुलाकातें थी वो
जब मैंने जाना था
नज़रों से कैसे पिघलते हैं दिल
और
आरजू पाती है कैसे मंजिल
और
कैसे उतरता है चाँद जमीन पर
कैसे कभी लगता है स्वर्ग अगर है
तो बस है यहीं पर

उसने बताया मुझे, और समझाया मुझे
हम जो मिले हैं, हमें ऐसे ही मिलना था
गुल जो खिले हैं, उन्हें ऐसे ही खिलना था
जन्मों के बंधन, जन्मों के रिश्ते हैं
जब भी हम जन्मे तो हम यूँ ही मिलते हैं
कानों में मेरे जैसे, शहद से घुलने लगे
ख़्वाबों के दर जैसे आखों मैं खुलने लगे
ख़्वाबों की दुनिया भी कितनी हसीं
और
कैसी रंगीन थी ख़्वाबों की दुनिया
जो कहने को थी पर कहीं भी नहीं थी
ख्वाब जो टूटे मेरे, आँख जो खुली मेरी
होश जो आया मुझे
मैंने देखा मैंने जाना
वो जो कभी आया था, नज़रों पे छाया था
दिल मैं समाया था, जा भी चूका है
और दिल मेरा अब तनहा तनहा
न तो कोई अरमान है, न कोई तमन्ना है
और न कोई सपना है
अब जो मेरे दिन और अब जो मेरी रातें हैं
उनमें सिर्फ आँसू हैं
उनमें सिफ दर्द की रंज की बातें हैं
और फरियादें हैं
मेरा अब कोई नहीं 
मैं हूँ और खोये हुए प्यार की यादें हैं
मैं हूँ और खोये हुए प्यार की यादें हैं
मैं हूँ और खोये हुए प्यार की यादें हैं

पिया मोरा.. मोरा पिया : राजनीति (2010)

पिया मोरा.. मोरा पिया
मानत नाहिं
मोरा पिया मोसे बोलत नाहिं
द्वार जिया के के खोलत नाहिं
मोरा पिया मोसे...

दर्पण देखूं, रूप निहारूं
और सोलह श्रृंगार करूँ
फेर नजरिया बैठा बैरी
कैसे अँखियाँ चार करूं
कोई जतन अब, काम ना आवे
उस कछु सोहत नाहिं
मोरा पिया मोसे...

हमरी इक मुस्कान पे वो तो
अपनी जान लुटाता था
जग बिसरा के आठों पहरिया
मोरे ही गुण गाता था
भा गई का कोई सौतन ओ के
मोरा कुछ भावत नाहिं 
मोरा पिया मोसे...

दिल चाहता है : दिल चाहता है (2001)

दिल चाहता है
कभी ना बीतें चमकीले दिन
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी यारों के बिन
दिन-दिन भर हों प्यारी बातें
झूमें शामें गायें रातें
मस्ती में रहे डूबा-डूबा हमेशा समाँ
हमको राहों में यूँ ही मिलती रहें खुशियाँ

जगमगाते हैं, झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे रौशनी रहे अपने वास्ते

जहाँ रुकें हम जहाँ भी जाएं
जो हम चाहें वो हम पाएं
मस्ती में रहे...

कैसा अजब ये सफ़र है
सोचो तो हर इक ही बेखबर है
उसको जाना किधर है
जो वक़्त आए, जाने क्या दिखाए
दिल चाहता है...

रंग बिरंगे मौसम आएँ
नए नए वो सपने लाएँ
महकी रहें ख्वाबों की हसीं वादियाँ
खिलते रहें यूँ ही प्यार के ये गुलसिताँ
दिल चाहता है...

फिर से मिलें जो हम दीवाने
तो ये समझें ये तो ये जानें
हम भी रहें यार हमारे जहाँ आए नहीं
कभी हममें कोई दूरियाँ
दिल चाहता है...

बीते लम्हें : द ट्रेन (2007)

दर्द में भी ये लब मुस्कुरा जाते हैं 
बीते लम्हें हमें जब भी याद आते हैं

चन्द लम्हात के वास्ते ही सही 
मुस्कुरा कर मिली थी मुझे ज़िन्दगी
तेरी आगोश में दिन थे मेरे कटे
तेरी बाहों में थी मेरी रातें कटीं 
आज भी जब वो पल मुझको याद आते हैं
दिल से सारे गमों को भुला जाते हैं
दर्द में... 

किस कदर तेज़ रफ़्तार थी ज़िन्दगी 
कहकहे हर तरफ़ थी खुशी ही खुशी
मैंने जिस दिन कही प्यार की बात थी 
रुक गई थी अचानक वो बहती नदी
आज भी जब वो दिन मुझको याद आते हैं 
गुज़रे लम्हें ज़हन में उभर आते हैं 
दर्द में...

मेरे कांधे पे सिर को झुकाना तेरा 
मेरे सीने में खुद को छुपाना तेरा
आके मेरी पनाहों में शाम-ओ-सहर
कांच की तरह वो टूट जाना तेरा
आज भी जब वो मन्ज़र नज़र आते हैं 
दिल की विरानियों को मिटा जाते हैं 
दर्द में...
Google Analytics Alternative